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पसंद

पसंद और ना पसंद इस बात पर भी निर्भर करती है कि वक़्त और ज़रूरत कैसी है कभी कभी सबसे ज़्यादा नापसंदीदा चीज़ पहले ज़रूरत बन फिर पसंद की जाने लगती है इसलिए किसी चीज़ को हक़ीर या गिरी हुई न समझा करो क्यों कि कौन किस वक़्त तुम्हारी ज़रूरत बन जाये।

 
 
 

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