पसंदImran Hasan KhanJul 25, 20201 min readपसंद और ना पसंद इस बात पर भी निर्भर करती है कि वक़्त और ज़रूरत कैसी है कभी कभी सबसे ज़्यादा नापसंदीदा चीज़ पहले ज़रूरत बन फिर पसंद की जाने लगती है इसलिए किसी चीज़ को हक़ीर या गिरी हुई न समझा करो क्यों कि कौन किस वक़्त तुम्हारी ज़रूरत बन जाये।
हम जीतेंगेतेज़ हवाओं में पत्ते जब आपस मे टकराते हैं हक़ीक़त में वो टकराते नहीं वो आपस मे बातें करते हैं एक दूसरे को हिम्मत दिलाते हैं कि हर आने वाले...
जिस्मजिस्म का हर हिस्सा अपना होता है जब कभी कोई हिस्सा ज़ख्मी होता है तो दिलोदिमाग़ बेचैन हो उठता है ऐसा नही कि कोई छोटा और कम अहमियत वाला...
आगे बढ़ेंबर्फीले मैदान हो या ज़िन्दगी के तूफान ,इंसान आगे तभी बढ़ सकता है जब वह अपने हाथ से दूसरे के हाथ को मज़बूती से पकड़े,समाज साथ होने बनता है और...
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