आगे बढ़ेंImran Hasan KhanJul 23, 20201 min readबर्फीले मैदान हो या ज़िन्दगी के तूफान ,इंसान आगे तभी बढ़ सकता है जब वह अपने हाथ से दूसरे के हाथ को मज़बूती से पकड़े,समाज साथ होने बनता है और अकेलापन समाज मे अँधेरापन बढ़ाता है। इसलिए आओ साथ चले,साथ साथ आगे बढ़ें।
हम जीतेंगेतेज़ हवाओं में पत्ते जब आपस मे टकराते हैं हक़ीक़त में वो टकराते नहीं वो आपस मे बातें करते हैं एक दूसरे को हिम्मत दिलाते हैं कि हर आने वाले...
जिस्मजिस्म का हर हिस्सा अपना होता है जब कभी कोई हिस्सा ज़ख्मी होता है तो दिलोदिमाग़ बेचैन हो उठता है ऐसा नही कि कोई छोटा और कम अहमियत वाला...
पसंदपसंद और ना पसंद इस बात पर भी निर्भर करती है कि वक़्त और ज़रूरत कैसी है कभी कभी सबसे ज़्यादा नापसंदीदा चीज़ पहले ज़रूरत बन फिर पसंद की जाने...
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